प्रफुल चव्हाण | इन इंडिया लाइव
मुंबई, 30 जुलाई: वरिष्ठ नागरिकों के आवेदनों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों को अब किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी। वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण से जुड़े प्रत्येक आवेदन पर अधिकतम 90 दिनों के भीतर फैसला देना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना किसी उचित कारण के देरी करने या आवेदन लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बदलते पारिवारिक ढांचे के कारण अनेक बुजुर्ग माता-पिता अपने ही बच्चों की उपेक्षा, आर्थिक शोषण और मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं। भोजन, वस्त्र, आवास और उपचार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। इन बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
"माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007" के तहत गठित वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है।
नई व्यवस्था के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक का आवेदन प्राप्त होते ही उसी दिन उसका पंजीकरण कर रसीद देना अनिवार्य होगा। आवेदन दाखिल होने के बाद अधिकतम 90 दिनों के भीतर अंतिम आदेश जारी करना होगा। बिना कारण सुनवाई टालने की अनुमति नहीं होगी। पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए पहले चरण में आपसी समझौते और काउंसलिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकृत भरण-पोषण भत्ते की वसूली आवश्यक होने पर पुलिस की सहायता से कराई जाएगी।
सभी संभागीय आयुक्तों को जिलावार दर्ज, निपटाए गए और लंबित मामलों की मासिक समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक जिला कलेक्टर कार्यालय में 'वरिष्ठ नागरिक सहायता कक्ष' स्थापित कर शिकायतों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, "वरिष्ठ नागरिकों के आवेदन लंबित रखने या अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने में किसी भी प्रकार की देरी सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।

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