प्रफुल चव्हाण | इन इंडिया लाइव
उल्हासनगर, दि. 5 जुलाई : महाराष्ट्र सरकार ने प्रतिबंधित प्लास्टिक पर सख्त रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन उल्हासनगर में हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं। शहर के बाजारों, सब्जी मंडियों, किराना दुकानों और फेरीवालों के यहां प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियां खुलेआम बिक और इस्तेमाल हो रही हैं।
ऐसे में शहर में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह अवैध कारोबार किसी सत्ताधारी राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव है? यदि प्रशासन प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू कर रहा है, तो फिर प्रतिबंधित प्लास्टिक की सप्लाई चेन अब तक क्यों नहीं टूटी? बड़े गोदामों और सप्लायरों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधित प्लास्टिक नालों को जाम करने, जलभराव बढ़ाने और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने का प्रमुख कारण है। इसके बावजूद यदि यह कारोबार निर्बाध रूप से जारी है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
लोगो का कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि प्रतिबंधित प्लास्टिक की आपूर्ति करने वाले बड़े नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई तरह की चर्चाओं को बल मिल रहा है। इन परिस्थितियों में लोग यह मांग कर रहे हैं कि यदि किसी सत्ताधारी नेता का संरक्षण हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए।
जनता के सवाल:
- प्रतिबंधित प्लास्टिक शहर में पहुंच कैसे रही है?
- बड़े सप्लायरों और गोदामों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
- क्या जिम्मेदार विभाग नेटवर्क तक पहुंचने में विफल रहा है?
- क्या राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। यदि वह इन सवालों का पारदर्शी जवाब देता है और पूरे सप्लाई नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई करता है, तो जनता का विश्वास मजबूत होगा। अन्यथा, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उठ रहे सवाल और तेज हो सकते हैं।
इन इंडिया लाइव इस पूरे मामले की पड़ताल जारी रखे हुए है। यदि किसी जनप्रतिनिधि,अधिकारी या अन्य व्यक्ति पर कोई आरोप सामने आता है, तो उनका नाम भी प्रकाशित किया जाएगा।

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