प्रफुल चव्हाण | इन इंडिया लाईव्ह
उल्हासनगर : महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से पर्यावरण संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध को लेकर बड़े स्तर पर जनजागृति अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ठाणे जिले के उल्हासनगर में प्रतिबंधित प्लास्टिक की खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल का मामला सामने आने से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुंबई के यशवंतराव चव्हाण केंद्र में विश्व वसुंधरा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे की प्रमुख उपस्थिति में ‘वसुंधरा रक्षक अभियान 2026’ सहित पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपक्रमों का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष सिद्धेश कदम भी उपस्थित थे।
इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रतिबंध को लेकर नागरिकों में जनजागृति का संदेश दिया गया। सरकार की ओर से प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए नियमों के प्रभावी अमल पर भी जोर दिया जा रहा है।
लेकिन उल्हासनगर में तस्वीर कुछ अलग ही नजर आ रही है।
उल्हासनगर के नेहरू चौक परिसर में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री की बिक्री और इस्तेमाल होता दिखाई देने का दावा सामने आया है। इससे सवाल उठ रहा है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्लास्टिक बंदी अभियान का स्थानीय स्तर पर कितना प्रभावी अमल हो रहा है?
एक तरफ पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे की उपस्थिति में ‘वसुंधरा रक्षक अभियान’ के जरिए प्लास्टिक मुक्त महाराष्ट्र का संदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ उल्हासनगर में प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री पर रोक लगाने में प्रशासन कितना सफल रहा है, यह सवाल अब नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
क्या ‘वसुंधरा रक्षक अभियान’ केवल जनजागृति और कार्यक्रमों तक सीमित रहेगा, या प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचने वालों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई भी होगी? उल्हासनगर के नागरिक अब प्रशासन से इसी सवाल का जवाब चाहते हैं।

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